तप का फल व्यर्थ नहीं जाता

यदि विधि होगी तो विधि मिलेगी और नहीं होगी तो नहीं मिलेगी। भूख से कम भोजन करना भी बडा तप है। जीव के पुण्य क्षीण होने लगे तो उसके चेहरे से खुशी गायब हो जाती है। उसके भाव विशुद्ध नहीं रहते हैं। तप का फल कभी व्यर्थ नहीं जाता हैं।

उन्होंने कहा जो विद्यार्थी तपस्या नहीं करता है। वह फेल हो जाता है। विद्यार्थी जीवन में जिसने भी संयम धर्म का पालन कर लिया। तो वह कभी किसी भी परीक्षा में फेल नहीं होता है। उदाहरण देते हुए बताया कि दूध को तपाने के लिए बर्तन की आवश्यकता होती है। और यदि वर्तन न हो तो दूध को तपाया नहीं जा सकता है।

साधना वह है जो नदी की धार बनके बहे। साधना वह नहीं जो बिल्ली की आवाज बनकर निकले। मोक्ष मार्ग की साधना रत्नात्रय के पालन में है। श्रेष्ठ मार्ग से नीचे की ओर उतरना महापुरूषों का काम नहीं है। तीर्थकर संस्कृति, श्रवण संस्कृति में गिरकर मोक्ष मार्ग ग्रहण नहीं किया जाता है। घर में लडडू जब बन पाते है जब चाशनी से तार टूटना प्रारंभ हो जाए।

4 comments

  1. P.Jain says:

    Namostu Aacharya Shree

  2. Pavan jain says:

    I want parvachan & wanst to dowan load aachriya shri granths