भव्य चातुर्मास कलश स्थापना समारोह, नागपुर -“द्वेष दृष्टि मैं तत्व दृष्टि क़ा सदभाव कहा ?”

परम पूज्य चर्या शिरोमणि आचार्य 108 श्री विशुद्ध सागर जी महाराज ससंघ का भव्य चातुर्मास कलश स्थापना समारोह, हेडगेवार भवन , नागपुर मैं दिनांक 27 जुलाई 2013 को मनाया गया !

समारोह मैं  देश सम्पूर्ण देशभर के श्रावको ने आचार्य श्री का आशीर्वाद प्राप्त किया ! इस अवसर पर जबलपुर, सागर, भोपाल, दुर्ग, झाँसी ललितपुर आगरा, अशोक नगर, पन्ना, अमरावती, सोलापुर, जयपुर, मुंबई, पुणे, अहमदाबाद, बांसवाडा आदि स्थानों से बस भरकर श्रावक महोत्सव का आनंद लेने पहुचे ! आचार्य श्री का भव्य ऐतिहासिक उद्बोधन मैं कहा की संत समाज की आस्था का प्रतिक होता है !

संत की दर्शन ज्ञान विशुद्धि से परिपूर्ण चर्या अनेक जीवो का मोक्ष मार्ग प्रशस्त करती है! उन्हो कहा की पंथ वाद संतवाद और क्षेत्रवाद, सम्यक्द्रिष्टि जीव के लक्षण नहीं है ! सम्यक दृष्टी  का लक्ष्य एक मात्र मोक्ष क़ि प्राप्ति ह द्वेष दृष्टि को तत्व दृष्टि क़ा सदभाव कहा…

सच्चा भाव लिंगी मुनि पर आस्तित्व मैं निज के आस्तित्व की खोज कहा करेगा ! निज गुणों से मंडित है यह स्वयं के द्वारा स्व सम्मान है ! पर सम्मान पराधीन है ! अहंकार भी आ सकता है ! आपके नास्ति धर्म से मेरे आस्ति धर्म क़ा नाश नहीं होता ! ऐसा श्रद्धान जिसे नहीं है वो सम्यक दृष्टि हो नहीं सकता जो जीव पर सम्मान अपमान मैं स्व सम्मान अपमान खोज रहे है! उन्हें स्व आस्तित्व गुण का बोध नहीं है !